भारत में लड़कियों के स्कूल छोडऩे की दर चिंताजनक : यूनिसेफ

भारत में लड़कियों के स्कूल छोडऩे की दर चिंताजनक : यूनिसेफ
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लंदन। यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रन फंड्स (यूनिसेफ) इंडिया ने कोविड महामारी के कारण लड़कियों के स्कूल छोडऩे की दर पर चिंता जताई और दावा किया कि स्कूल बंद होने से भारत में लगभग 24.7 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं। इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर किए गए यूनिसेफ के यू रिपोर्ट सर्वेक्षण से पता चला है कि कम से कम 38 प्रतिशत लोगों को ऐसी लडक़ी के बारे में पता था, जिसने स्कूल छोड़ दिया। इसके अलावा 33 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि जो लड़कियां पढ़ाई छोड़ती हैं, वे घरेलू काम में लगी हुई हैं जबकि 25 प्रतिशत ने बताया कि लड़कियों ने शादी कर ली।

बयान के अनुसार,जैसा कि कोविड-19 के मामलों में कमी जारी है, देश भर के स्कूल फिर से खुल गए हैं। पिछले दो वर्षों में महामारी की बार-बार लहरों के कारण कई बार स्कूलों को बंद करना और फिर से खोलना पड़ा, जिससे लाखों बच्चों की शिक्षा में बाधा उत्पन्न हुई। स्कूल बंद होने के कारण से देश में 24.7 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए।
यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूआईडीआईएसई+) 2020-21 के अनुसार, माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए वार्षिक कमी दर 14.6 प्रतिशत थी। यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधि यासुमासा किमुरा ने कहा कि लड़कियों पर प्रभाव बहुत ज्यादा खराब है। उन्होंने कहा,मौजूदा स्थिति के साथ, हम उन बच्चों की खोई हुई पीढ़ी को जोखिम में डाल सकते हैं जो कभी स्कूल नहीं लौट सकते।

यूनिसेफ इंडिया ने 2021 में 17 राज्यों में 1.55 करोड़ बच्चों (50.5 प्रतिशत लड़कियों) को घर से सीखना जारी रखने में मदद करने के लिए सरकार और भागीदारों को तकनीकी सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा,भारत में महामारी की तीसरी लहर से पहले, अधिकांश राज्य सरकारों ने शिक्षा मंत्रालय से प्रदान किए गए तकनीकी मार्गदर्शन के साथ स्कूलों को फिर से खोलने की तैयारी शुरू कर दी थी, जिसमें यूनिसेफ ने योगदान दिया था।

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